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Annexure – XII - भारतीय रेल में अनुबंध प्रबंधन (Contract Management in Indian Railways)
Annexure – XII
भारतीय रेल में अनुबंध प्रबंधन (Contract
Management in Indian Railways)
Annexure – XI - Government e-Marketplace (GeM) Procurement in Indian Railways
Annexure – X - भारतीय रेल में क्रय प्रक्रिया (Procurement Process in Indian Railways)
Annexure – X
भारतीय रेल में क्रय प्रक्रिया (Procurement
Process in Indian Railways)
भारतीय
रेल केवल देश का सबसे बड़ा नियोक्ता (Employer) ही नहीं
है बल्कि भारत सरकार का सबसे बड़ा उपभोक्ता (Consumer) भी
है। प्रत्येक वर्ष रेलवे अरबों रुपये मूल्य की सामग्री (Stores), उपकरण (Equipment), रोलिंग स्टॉक (Rolling
Stock) और सेवाओं (Services) की खरीद
करता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया को क्रय प्रक्रिया (Procurement Process) कहा जाता है और यह Indian Railway Stores Code, Purchase
Manual, Finance Code तथा General Financial Rules (GFR) के अधीन संचालित होती है।
परिभाषा (Definition)
क्रय प्रक्रिया (Procurement Process) से आशय उस समग्र प्रणाली से है जिसके अंतर्गत भारतीय रेलवे अपनी आवश्यक वस्तुओं, सामग्रियों और सेवाओं की योजना, निविदा, मूल्यांकन, स्वीकृति, आपूर्ति और भुगतान करती है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक चरण का अपना विशेष महत्व है। सबसे पहले, योजना (Planning) के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाता है कि किन वस्तुओं और सेवाओं की आवश्यकता है और उन्हें किस समय पर उपलब्ध कराना है। इसके बाद, निविदा (Tendering) प्रक्रिया के द्वारा विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से प्रतिस्पर्धात्मक प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं। प्रस्तावों के प्राप्त होने के बाद मूल्यांकन (Evaluation) किया जाता है, ताकि गुणवत्ता, लागत और समय सीमा के आधार पर सर्वोत्तम विकल्प चुना जा सके। इसके पश्चात् स्वीकृति (Acceptance) दी जाती है और आपूर्ति (Supply) की प्रक्रिया शुरू होती है। अंततः, पूरी प्रक्रिया के पूरा होने पर भुगतान (Payment) किया जाता है।
Annexure – IX - भारतीय रेल में पूंजीगत व्यय एवं आकलन प्रणाली (Capital Expenditure & Estimates in Indian Railways)
Annexure – IX
भारतीय रेल में पूंजीगत व्यय एवं आकलन प्रणाली (Capital
Expenditure & Estimates in Indian Railways)
भारतीय रेल का नेटवर्क निरंतर विकास और आधुनिकीकरण
की प्रक्रिया से गुजर रहा है। इस विकास के लिए विशाल पूंजीगत निवेश (Capital
Investment) की आवश्यकता होती है। नई
रेल लाइनों का निर्माण (New Line Construction), दोहरीकरण (Doubling), विद्युतीकरण (Electrification), स्टेशन पुनर्विकास (Station
Redevelopment), रोलिंग स्टॉक (Rolling
Stock) की खरीद और कार्यशालाओं का
विस्तार (Workshops Expansion) सभी पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की श्रेणी में आते हैं।
रेलवे वित्त प्रबंधन में पूंजीगत व्यय को सही ढंग से
नियंत्रित करने के लिए आकलन प्रणाली (Estimates System) अपनाई गई है। आकलन (Estimates) वह आधार है जिस पर किसी परियोजना की
व्यवहार्यता (Feasibility), अनुमानित
लागत (Cost) और संसद से
स्वीकृति (Parliamentary Sanction) सुनिश्चित होती है।
पूंजीगत व्यय
की परिभाषा
पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) से आशय ऐसे व्यय से है, जो रेलवे की स्थायी परिसंपत्तियों (Permanent Assets) में वृद्धि करता है और भविष्य में रेलवे को आय (Revenue) अथवा अन्य प्रकार का लाभ (Benefit) प्रदान करता है। इस प्रकार का व्यय केवल चालू खर्च तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि से रेलवे की बुनियादी संरचना को मज़बूती प्रदान करता है। वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से इसे बैलेंस शीट (Balance Sheet) में परिसंपत्ति (Asset) के रूप में दर्शाया जाता है, न कि राजस्व व्यय के रूप में। उदाहरणस्वरूप, नई लाइन का निर्माण, डबल, थर्ड अथवा चौथी लाइन का निर्माण, गेज परिवर्तन (Gauge Conversion), विद्युतीकरण, नए इंजन, डिब्बों और वैगनों की खरीद, तथा स्टेशन का आधुनिकीकरण ऐसे ही पूंजीगत व्यय की श्रेणी में आते हैं। इन कार्यों का सीधा उद्देश्य भविष्य में रेलवे की क्षमता (Capacity), दक्षता (Efficiency) और आय (Revenue Generation) को बढ़ाना होता है।
Annexure – VIII - भारतीय रेल में कार्य कार्यक्रम (Works Programme in Indian Railways)
Annexure – VIII
भारतीय रेल में कार्य कार्यक्रम (Works
Programme in Indian Railways)
भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और इसका निवेश (Investment) व्यापक तथा विविध क्षेत्रों में होता है – नई लाइनों का निर्माण (New Line Construction), दोहरीकरण (Doubling), विद्युतीकरण (Electrification), रोलिंग स्टॉक (Rolling Stock) की खरीद, कार्यशालाओं का विस्तार (Workshops Expansion) तथा स्टेशन पुनर्विकास (Station Redevelopment) आदि। इन सभी पूंजीगत कार्यों (Capital Works) को सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध ढंग से संचालित करने के लिए रेलवे में कार्य कार्यक्रम (Works Programme) की व्यवस्था लागू है।
Annexure – VII - भारतीय रेल में हरित पहल और वित्तीय दृष्टिकोण (Green Initiatives in Indian Railways Finance)
भारतीय रेल
में हरित पहल और वित्तीय दृष्टिकोण (Green Initiatives in Indian Railways
Finance)
भारतीय
रेल केवल दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क ही नहीं है, बल्कि
इसे “Green Transporter of the Nation” भी कहा जाता है।
हाल के वर्षों में रेलवे ने वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) को पर्यावरणीय लक्ष्यों (Environmental Goals) से जोड़ते हुए ग्रीन बजटिंग (Green Budgeting) की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन पहलों ने रेलवे को सतत
विकास (Sustainable Development) के मार्ग पर अग्रसर किया
है।
सौर ऊर्जा
पहल (Solar Energy Initiatives)
भारतीय रेल ने अपने ऊर्जा व्यय (Energy
Expenditure) को कम करने और स्वच्छ
ऊर्जा (Clean Energy) के उपयोग
को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा परियोजनाएँ (Solar Energy
Projects) शुरू की हैं। यह पहल न केवल
लागत में बचत करती है, बल्कि
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
इस योजना के तहत कई रेलवे स्टेशन, कोच और कार्यालयों में सौर पैनल (Solar Panels) लगाए गए हैं। वडोदरा, सौराष्ट्र और दिल्ली मंडल के कई स्टेशन आज पूर्ण या आंशिक रूप से सौर ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं, जो भारतीय रेल की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अतिरिक्त, Solar Rooftop Policy के अंतर्गत भारतीय रेल ने नवीकरणीय ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए Power Purchase Agreements (PPAs) भी किए हैं। इन समझौतों के माध्यम से रेल को निरंतर और किफायती सौर ऊर्जा उपलब्ध हो रही है।
