रेलवे वित्त आयुक्त (Financial Commissioner – FC) भारतीय रेलवे के वित्तीय प्रबंधन में केंद्रीय स्तंभ होते हैं। वे रेलवे बोर्ड (Railway Board) के सदस्य होते हैं और रेलवे के सर्वोच्च वित्तीय सलाहकार एवं नियंत्रक (Chief Financial Advisor & Controller) माने जाते हैं। FC का पद केवल एक प्रशासनिक भूमिका नहीं है, बल्कि यह रेलवे की वित्तीय नीति, व्यय नियंत्रण (Expenditure Control), बजट प्रबंधन (Budgetary Management) और संसाधनों के न्यायसंगत आवंटन (Resource Allocation) में निर्णायक भूमिका निभाता है।
1. सरकारी वित्तीय नीति (Government Financial Policy) का
समन्वय
FC सीधे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) और रेलवे मंत्रालय (Ministry of Railways) के साथ निरंतर संपर्क में रहते हैं। इस संपर्क का उद्देश्य रेलवे की वित्तीय नीतियों (Financial Policies) को केंद्रीय वित्तीय दिशा-निर्देशों (Central Financial Guidelines) और राष्ट्रीय बजटीय लक्ष्यों (National Budgetary Objectives) के अनुरूप बनाना है। FC यह सुनिश्चित करते हैं कि रेलवे के वित्तीय निर्णय सरकार के नियामक ढांचे (Regulatory Framework) के अनुरूप हों और संसाधनों का उपयोग प्रभावी ढंग से किया जाए।
