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अध्याय 11 - रेलवे कोष और निधियाँ (Railway Funds & Reserves)

  Paperback Book भारतीय रेल : वित्तीय नियम एवं प्रबंधन 

eBook भारतीय रेल : वित्तीय नियम एवं प्रबंधन


भारतीय रेल न केवल देश की जीवनरेखा (Lifeline of the Nation) है, बल्कि यह विश्व के सबसे बड़े एकीकृत परिवहन नेटवर्कों में से एक भी है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री और लाखों टन माल इस प्रणाली के माध्यम से गंतव्य तक पहुँचते हैं। इतना विशाल संगठन केवल परिचालन दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वित्तीय दृष्टि से भी एक जटिल संरचना का परिचायक है। भारतीय रेल का वार्षिक बजट कई राज्यों के सम्मिलित बजट के बराबर होता है और इसमें राजस्व, पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure), रखरखाव (Maintenance) तथा पेंशन जैसी प्रतिबद्धताओं पर व्यय का व्यापक प्रावधान शामिल होता है।

ऐसे विशाल संस्थान के सुचारु संचालन और दीर्घकालिक विकास के लिए यह आवश्यक है कि केवल चालू आय-व्यय (Current Income & Expenditure) का ही ध्यान न रखा जाए, बल्कि भविष्य की अनिश्चितताओं, आकस्मिक परिस्थितियों तथा परिसंपत्तियों के पुनर्नवीनीकरण (Renewal) हेतु भी पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुरक्षित रखे जाएँ। इसी उद्देश्य से भारतीय रेल ने विभिन्न प्रकार के कोष (Funds) और निधियाँ (Reserves) स्थापित की हैं।

ये निधियाँ रेलवे की वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) बनाए रखने, पारदर्शिता (Transparency) को सुदृढ़ करने तथा संसद के प्रति उत्तरदायित्व (Accountability to Parliament) सुनिश्चित करने का साधन हैं। साथ ही, ये अप्रत्याशित संकटों से निपटने के लिए वित्तीय कवच (Financial Cushion) प्रदान करती हैं। इस अध्याय में हम रेलवे निधियों के महत्व, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रबंधन, चुनौतियाँ, आधुनिक सुधार और भविष्य की दिशा का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

1. रेलवे कोष और निधियों का महत्व (Importance of Railway Funds & Reserves)

भारतीय रेल की निधियाँ केवल संख्यात्मक प्रावधान नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसी वित्तीय संरचना हैं जो संगठन की स्थिरता और साख (Credibility) को परिभाषित करती हैं। इन निधियों का महत्व कई दृष्टियों से स्पष्ट होता है—

(क) अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटना:

रेल दुर्घटनाएँ, प्राकृतिक आपदाएँ, पुलों या पटरियों में अचानक आई बड़ी क्षति, अथवा रोलिंग स्टॉक के आकस्मिक प्रतिस्थापन जैसी परिस्थितियों में तुरंत वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे समय निधियाँ संगठन को बिना अतिरिक्त राजस्व दबाव डाले त्वरित राहत प्रदान करती हैं।

(ख) पूँजीगत निवेश और आधुनिकीकरण:

रेलवे को निरंतर नई तकनीक अपनानी होती है—विद्युतीकरण, सिग्नलिंग आधुनिकीकरण (Signalling Modernization), हाई-स्पीड ट्रेनें, और स्टेशन पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक निवेश चाहिए। विकास निधियाँ (Development Funds) इस आवश्यकता को पूरा करती हैं।

(ग) पेंशन और कर्मचारी लाभ:

भारतीय रेल देश का सबसे बड़ा नियोक्ता (Largest Employer) है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन देनदारियाँ (Pension Liabilities) और चालू कर्मचारियों की सुविधाओं का निर्वहन निधियों के बिना संभव नहीं।

(घ) वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता:

निधियों का पृथक्करण यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक फंड का उपयोग केवल उसके निर्दिष्ट उद्देश्य (Earmarked Purpose) के लिए हो। इससे वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व (Public Accountability) दोनों सुदृढ़ होते हैं।

(ङ) संसदीय उत्तरदायित्व:

संसद और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (C&AG) निधियों के प्रबंधन की समीक्षा करते हैं। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने और जन विश्वास (Public Trust) कायम रखने में सहायक होती है।


2. रेलवे निधियों की श्रेणियाँ (Categories of Railway Funds)

भारतीय रेल में निधियों को मुख्यतः पाँच प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है। प्रत्येक निधि का विशिष्ट उद्देश्य, स्रोत और प्रबंधन तंत्र है।

(क) डेप्रिसिएशन रिज़र्व फंड (Depreciation Reserve Fund – DRF)

डेप्रिसिएशन रिज़र्व फंड का मुख्य उद्देश्य रेलवे की परिसंपत्तियों जैसे पटरियाँ, पुल, कोच, इंजन और सिग्नलिंग सिस्टम के नवीनीकरण और प्रतिस्थापन को सुनिश्चित करना है। इस फंड की विशेषता यह है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में रेलवे की सकल आय से एक निश्चित अंश DRF में जमा किया जाता है। इस निधि का उपयोग पटरियों के नवीनीकरण, कोच और इंजन के प्रतिस्थापन, सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणाली के नवीनीकरण और पुलों के पुनर्विकास में किया जाता है। हालांकि, राजस्व पर बढ़ते दबाव और यात्री किराए में राजनीतिक कारणों से सीमित वृद्धि के चलते हाल के वर्षों में DRF में पर्याप्त आवंटन नहीं हो पाया, जिसके परिणामस्वरूप परिसंपत्तियों के प्रतिस्थापन में देरी हुई और परिचालन सुरक्षा प्रभावित हुई।

(ख) पेंशन फंड (Pension Fund)

पेंशन फंड का उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करना है। यह भारतीय रेल का सबसे बड़ा वित्तीय दायित्व है और वर्तमान में हर माह हज़ारों करोड़ रुपये पेंशन भुगतान में खर्च होते हैं। पेंशन फंड पर दबाव के प्रमुख कारणों में कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि, जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी और NPS से बाहर पुरानी सेवा की देनदारियाँ शामिल हैं। रेलवे बोर्ड की 2023–24 की रिपोर्ट के अनुसार, पेंशन व्यय कुल राजस्व व्यय का लगभग एक-चौथाई है।

(ग) विकास फंड (Development Fund)

विकास फंड का उद्देश्य नई लाइनों का निर्माण, स्टेशन आधुनिकीकरण, यात्री सुविधाओं का संवर्द्धन, विद्युतीकरण और तकनीकी उन्नयन को सुनिश्चित करना है। यह फंड रेलवे के दीर्घकालिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का माध्यम है। हालांकि, कभी-कभी राजनीतिक दबाव के कारण गैर-प्राथमिकता वाली परियोजनाओं पर भी इस निधि का उपयोग कर लिया जाता है, जिससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग प्रभावित होता है।

(घ) रेलवे सुरक्षा कोष (Railway Safety Fund)

रेलवे सुरक्षा कोष का उद्देश्य परिचालन सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसमें लेवल क्रॉसिंग का उन्मूलन, स्वचालित सिग्नलिंग, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना और दुर्घटनारहित परिचालन हेतु प्रौद्योगिकियों का समावेश शामिल है। इस फंड में रेलवे की आय के साथ-साथ केंद्र सरकार का विशेष अनुदान भी सम्मिलित होता है। सुरक्षा निवेश की वास्तविक आवश्यकता और उपलब्ध फंड के बीच प्रायः बड़ा अंतर होता है। पर्याप्त निवेश न होने पर दुर्घटनाओं में कमी लाने में कठिनाई आती है और रेलवे आलोचना का सामना करता है।

(ङ) अन्य विशेष कोष (Other Special Funds)

अन्य विशेष कोषों में Capital Fund, Staff Benefit Fund, Railway Development Fund और हाल के वर्षों में स्थापित Green Energy Fund शामिल हैं। ये फंड विशिष्ट उद्देश्यों जैसे कर्मचारियों के कल्याण, पूँजीगत निवेश या पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए प्रयुक्त होते हैं।


3. निधियों का प्रबंधन (Management of Railway Funds)

भारतीय रेल में निधियों का प्रबंधन एक बहु-स्तरीय प्रणाली के अंतर्गत होता है।

(क) रेलवे बोर्ड (Railway Board):

सभी निधियों की नीति निर्धारण (Policy Formulation), समग्र निगरानी और आवंटन (Allocation) करता है।

(ख) वित्त आयुक्त (Financial Commissioner – Railways):
निधियों की लेखा-पद्धति (Accounting System) और व्यय की स्वीकृति पर सर्वोच्च वित्तीय नियंत्रण रखते हैं।

(ग) ज़ोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयाँ:

अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में निधियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए करती हैं।

नियंत्रण सिद्धांत (Principle of Control):

किसी भी निधि का उपयोग केवल उसी प्रयोजन के लिए किया जा सकता है, जिसके लिए वह स्थापित की गई है। यह सिद्धांत Railway Accounts Code और Appropriation Rules में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।


4. निधियों का लेखा (Accounting of Funds)

भारतीय रेल की निधियों का लेखा एक सुव्यवस्थित ढाँचे के अंतर्गत किया जाता है। प्रत्येक निधि का पृथक खाता (Separate Ledger) रखा जाता है, जिससे प्रत्येक निधि की स्थिति स्पष्ट रूप से ट्रैक की जा सके। निधियों की स्थिति वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) और विनियोजन लेखा (Appropriation Accounts) में दर्शाई जाती है, जो पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (C&AG) निधियों की ऑडिट करता है और उसकी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की जाती है, जिससे वित्तीय प्रबंधन की वैधता की पुष्टि होती है। हाल के वर्षों में Integrated Payroll & Accounting System (IPAS) तथा Integrated Financial Management System (IFMS) के माध्यम से निधियों की डिजिटल निगरानी की व्यवस्था की गई है, जो लेखा प्रक्रिया को और अधिक कुशल और सटीक बनाती है।


5. चुनौतियाँ (Challenges in Railway Funds Management)

भारतीय रेल के कोष प्रबंधन में अनेक गंभीर चुनौतियाँ लगातार सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी समस्या Depreciation Reserve Fund (DRF) में अपर्याप्त योगदान की है, जिसके कारण परिसंपत्तियों का समय पर प्रतिस्थापन संभव नहीं हो पाता। इसी प्रकार, पेंशन फंड पर असाधारण दबाव है, जहाँ कुल राजस्व व्यय का लगभग 25% से अधिक हिस्सा पेंशन मद में चला जाता है।

इसके अलावा, विकास फंड (Development Fund) का उपयोग कई बार विवेकपूर्ण ढंग से नहीं किया जाता और प्राथमिकताओं से हटकर परियोजनाओं पर व्यय हो जाता है। सुरक्षा फंड (Safety Fund) की उपलब्धता भी बढ़ते यात्री और माल यातायात के अनुपात में अपर्याप्त है, जिससे सुरक्षा निवेश प्रभावित होता है। कोविड-19 महामारी के बाद तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई, क्योंकि परिचालन व्यय तेजी से बढ़ा और साथ ही राजस्व में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। इन सभी चुनौतियों ने रेलवे की वित्तीय स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।


6. आधुनिक सुधार, पेंशन फंड का दबाव और भविष्य की दिशा

भारतीय रेल ने निधियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता को सुदृढ़ करने के लिए कई आधुनिक सुधार लागू किए हैं। IPAS (Integrated Payroll & Accounting System) के माध्यम से वेतन, पेंशन और लेखांकन को डिजिटल रूप में एकीकृत किया गया। इसके साथ ही, IFMS (Integrated Financial Management System) ने रेलवे और वित्त मंत्रालय के बीच प्रत्यक्ष समन्वय सुनिश्चित किया। पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और विद्युतीकरण के लिए Green Bonds के माध्यम से ग्रीन फाइनेंस जुटाया गया। वहीं, PPP (Public-Private Partnership) मॉडल के अंतर्गत स्टेशन पुनर्विकास और नई लाइनों में निजी निवेशकों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया गया। इसके अतिरिक्त, Railway Development Fund की स्थापना से यात्री सुविधाओं और डिजिटल परियोजनाओं के लिए समर्पित संसाधन उपलब्ध कराए गए।

इन सुधारों के बावजूद, पेंशन फंड भारतीय रेल के लिए सबसे गंभीर चुनौती बना हुआ है। रेलवे बजट 2023–24 के अनुसार, लगभग ₹60,000 करोड़ से अधिक राशि केवल पेंशन व्यय पर खर्च हुई। यह बोझ इतना अधिक है कि संचालन और पूँजीगत निवेश के लिए शेष संसाधन बेहद सीमित हो जाते हैं। इस समस्या के समाधान हेतु रेलवे द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें केंद्र सरकार से अतिरिक्त बजटीय सहायता (Budgetary Support) प्राप्त करना, NPS (New Pension Scheme) का विस्तार, दीर्घकालिक समाधान के लिए Dedicated Pension Corpus Fund का निर्माण तथा अन्य क्षेत्रों में निजी निवेश और PPP मॉडल के माध्यम से बोझ कम करना शामिल है।

भविष्य की दिशा में, रेलवे कोष प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कुछ ठोस कदम आवश्यक हैं। Accrual Based Accounting को अपनाकर केवल नकद लेन-देन के बजाय दीर्घकालिक दायित्वों और परिसंपत्तियों को भी प्रतिबिंबित किया जा सकेगा। पेंशन देनदारियों के लिए Dedicated Pension Corpus का निर्माण एक स्थायी समाधान प्रदान करेगा। निधियों का उपयोग केवल व्यय की मात्रा तक सीमित न रहकर Outcome-Oriented Utilization के आधार पर होना चाहिए, जहाँ खर्च का आकलन उसके वास्तविक परिणामों से जोड़ा जाए।


इसके अतिरिक्त, AI और Data Analytics का प्रयोग निधियों की वास्तविक समय में निगरानी और संसाधन आवंटन के वैज्ञानिक आकलन में सहायक होगा। साथ ही, Public Dashboard के माध्यम से निधियों की स्थिति और उपयोग से संबंधित सूचनाएँ जनता को पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इन पहलों से न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि रेलवे की वित्तीय विश्वसनीयता भी वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी।

 

7. निष्कर्ष (Conclusion)

रेलवे कोष और निधियाँ भारतीय रेल की वित्तीय स्थिरता और परिचालन विश्वसनीयता की आधारशिला हैं। DRF, Pension Fund, Development Fund और Safety Fund जैसे प्रमुख कोष संगठन को न केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम बनाते हैं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के प्रति तैयार रखते हैं।

यद्यपि चुनौतियाँ—विशेषकर पेंशन फंड पर दबाव और परिसंपत्तियों के प्रतिस्थापन हेतु अपर्याप्त DRF आवंटन—गंभीर हैं, परंतु आधुनिक सुधार जैसे डिजिटल लेखांकन प्रणाली (IPAS, IFMS), ग्रीन बॉन्ड, PPP मॉडल और परिणाम-उन्मुख व्यय प्रणाली भविष्य में इन चुनौतियों से निपटने में सहायक होंगे।

अतः कहा जा सकता है कि भारतीय रेल के कोष और निधियाँ न केवल वित्तीय अनुशासन का प्रतीक हैं, बल्कि संगठन की दीर्घकालिक स्थिरता और राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक सशक्त साधन भी हैं।


 

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