रेलवे प्रशासन में सामान्य सिद्धांत यह है कि किसी भी कार्य (Work) को तब तक प्रारम्भ नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उसके लिए सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की स्वीकृति (Sanction) तथा आवश्यक निधि (Funds) उपलब्ध न हो। यह सिद्धांत वित्तीय औचित्य (Financial Propriety) तथा बजटीय नियंत्रण (Budgetary Control) का मूल आधार है।
किन्तु कुछ असाधारण परिस्थितियों में, विशेषकर जब मानव जीवन (Life), रेलवे सम्पत्ति (Railway Property), संरक्षा (Safety) अथवा रेल यातायात (Rail Traffic) को तत्काल खतरा हो, तब कार्य प्रारम्भ करने में विलम्ब करना सार्वजनिक हित के प्रतिकूल हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में कार्य को तत्काल प्रारम्भ करने की अनुमति दी जाती है तथा बाद में सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त की जाती है। इस उद्देश्य से जो रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है उसे आवश्यकता प्रमाण-पत्र (Urgency Certificate) अथवा तात्कालिकता प्रतिवेदन (Urgency Report) कहा जाता है।
