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भण्डार निविदा एवं भण्डार निविदाओं के प्रकार (Stores Tender&Types of Stores Tenders)

 

भारतीय रेल में भण्डार (Stores) की खरीद (Procurement) एक महत्वपूर्ण वित्तीय एवं प्रशासनिक गतिविधि है। सार्वजनिक धन (Public Money) के सर्वोत्तम उपयोग, पारदर्शिता (Transparency), प्रतिस्पर्धा (Competition), निष्पक्षता (Fairness) तथा वित्तीय औचित्य (Financial Propriety) सुनिश्चित करने के लिए भण्डार सामग्री की खरीद सामान्यतः निविदा प्रणाली (Tender System) के माध्यम से की जाती है।

भारतीय रेल में निविदा प्रक्रिया का संचालन मुख्यतः रेलवे स्टोर्स कोड (Indian Railway Stores Code), सामान्य वित्तीय नियम (General Financial Rules – GFR 2017), रेलवे बोर्ड के समय-समय पर जारी निर्देशों तथा खरीद संबंधी नीतियों के अनुसार किया जाता है।

वर्तमान व्यवस्था में निविदाओं का उद्देश्य केवल न्यूनतम दर (Lowest Rate) प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उपयुक्त गुणवत्ता (Quality), समय पर आपूर्ति (Timely Delivery), विश्वसनीय स्रोत (Reliable Source) तथा जीवन-चक्र लागत (Life Cycle Cost) को ध्यान में रखते हुए सर्वाधिक लाभकारी प्रस्ताव (Most Advantageous Bid) का चयन करना है।)

आवश्यकता प्रमाण-पत्र (Urgency Certificate)

 


रेलवे प्रशासन में सामान्य सिद्धांत यह है कि किसी भी कार्य (Work) को तब तक प्रारम्भ नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि उसके लिए सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की स्वीकृति (Sanction) तथा आवश्यक निधि (Funds) उपलब्ध न हो। यह सिद्धांत वित्तीय औचित्य (Financial Propriety) तथा बजटीय नियंत्रण (Budgetary Control) का मूल आधार है।

किन्तु कुछ असाधारण परिस्थितियों में, विशेषकर जब मानव जीवन (Life), रेलवे सम्पत्ति (Railway Property), संरक्षा (Safety) अथवा रेल यातायात (Rail Traffic) को तत्काल खतरा हो, तब कार्य प्रारम्भ करने में विलम्ब करना सार्वजनिक हित के प्रतिकूल हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में कार्य को तत्काल प्रारम्भ करने की अनुमति दी जाती है तथा बाद में सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त की जाती है। इस उद्देश्य से जो रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है उसे आवश्यकता प्रमाण-पत्र (Urgency Certificate) अथवा तात्कालिकता प्रतिवेदन (Urgency Report) कहा जाता है।

TENDER COMMITTEE (निविदा समिति)

 TENDER COMMITTEE (निविदा समिति)

1. Tender Committee क्या है?

Tender Committee (TC) वह समिति है जिसे लागू Railway rules, Stores Code, Schedule of Powers तथा संबंधित procurement/contract की प्रकृति के अनुसार निविदाओं की जाँच, मूल्यांकन एवं सक्षम/स्वीकृति प्राधिकारी के लिए अनुशंसा (Recommendation) करने हेतु गठित किया जाता है।

Tender Committee का उद्देश्य प्राप्त tenders का निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ, तकनीकी, वाणिज्यिक एवं वित्तीय परीक्षण करके उचित recommendation देना है।

महत्वपूर्ण: Tender Committee की संरचना प्रत्येक प्रकार के tender में समान नहीं होती। Stores procurement, Works tender, Consultancy contract आदि के लिए लागू rules/SOP के अनुसार Committee की composition और accepting authority अलग हो सकती है। Railway Board के official records में Stores tenders के लिए Para 701 एवं 702 of Stores Code के संदर्भ में Tender Committee और Accepting Authority की व्यवस्था दी गई है।

Tender Notice & Tender Documents

TENDER NOTICE

The tender notice should in all cases state: -

 (i) Name and place of work 
(ii) Approximate cost of work 
(iii) Amount of earnest money and the form in which it can be deposited. 
(iv) Period of completion.
 (v) Place and time where tender documents can be seen. 
(vi) Place and time where tender documents can be obtained. 
(vii) Date and time up to which tender documents will be sold. 
(viii) The amount, if any, to be paid for such documents. 
(ix) The place where the date on which and the time when tender are to be submitted and are to be opened. 
(x) Any other information relevant in tender notice.

Letter of credit

Letter of credit 


It is a bank instrument frequently issued between banks in different countries for the payment of import contracts. It may be defined as an instrument authorizing the (issuing) bank on behalf of the purchaser (Applicant) to pay a certain sum of money to specified seller(s) (Beneficiary) provided the seller(s) submit the documents as prescribed in the Letter of Credit.

In other word letter of credit is a piece of document that serves as instruction of guaranteed payment from the buyer to the seller. Also known as a documentary credit, a letter of credit is issued by the bank and acts as a promise of timely payment to the seller. If the buyer supposedly fails to perform his due obligation, then the bank pays the seller on behalf of the buyer who in turn repays the bank. This is a brief summation of the letter of credit process.

Special Limited Tender:

Special Limited Tender

Except in respect of emergency purchases and safety items, this system may be applied to orders, in estimated value of which is Rs. 10 lakhs and above, with the sanction of the General Manager, subject to the following conditions:-

(a)That sufficient reasons exist which indicate that it is not in the public interest to call for tenders by advertisements. 

Limited Tender

Limited Tender


This system may ordinarily be adopted in the cases of the estimated tender value of which does not exceed Rs. 10 lakh. In case of items whose approved list of vendors is issued by centralized agency i.e. RDSO/Production Units (PUs)/CORE etc., this system may be adopted in the case of purchases, the estimated value of which does not exceed Rs. 2 crore.

Single Tender

Single Tender


This system may be adopted in case of purchase of items in following cases. 

1. Proprietary articles where it has been possible to certify that a similar article, which could be used in lieu is not manufactured /sold by any other firm (PAC ‘C’ certified), Purchase powers are of different officers Are upto their level of acceptance.

Short note on Earnest Money ( Hindi English)

EARNEST MONEY


(I) It is a security against loss in the event of the contractor failing to undertake the contract or to furnish the required security within the appointed time after acceptance of his tender, or until such time as the sums due to him form a sufficient guarantee.

(II) Amount of Earnest Money:
The tenderer shall be required to deposit earnest money along with the tender as a guarantee for the due performance of the conditions of the tender and to keep the offer open till such date as specified in the tender. The earnest money shall be 2% of the estimated tender value as indicated in the tender notice. The amount shall be rounded to the nearest ₹10. This earnest money requirement shall be applicable for all modes of tendering.

Short Note on Security Deposit

SECURITY DEPOSITS

(I) Amount of Security deposits are to be paid by the contractor for the due fulfilment of contracts. The security deposit/rate of recovery/mode of recovery on acceptance of tender shall be as under :

a. These security deposit for each work will be 5% of the contract value.

b. The rate of recovery will be at the rate of 10% of the bill amount till the full security amount is recovered.

निविदा (Tender)

निविदा (Tender)

 

नोट - जो भी आकड़े दर्शाए है समय समय पर परिवर्तन होता रहता है, वर्तमान आकड़े के लिये रेलवे बोर्ड के LATEST ORDER देखे

 

रेलवे व्दारा भण्डार की आपूर्ति अथवा निर्माण कार्यों के लिए जो सूचनाएँ प्रकाशित की जाती है, उन्हें निविदा कहते है। निविदा या टेंडर एक प्रकार का प्रस्ताव है जो कि ठेकेदारों के व्दारा कुछ निश्चित शर्तों एवं निश्चित अवधि में किसी कार्य को करने या भण्डार की आपूर्ति करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है।  

 

आमतौर पर सभी निर्माण कार्य करने, मरम्मत और संरक्षण या माल की सप्लाई के लिए ठेकेदारों की एजेंसी का प्रयोग किया जाता है। कोई कार्य या माल की सप्लाई का ठेका किसी ठेकेदारों को देने से पूर्व निश्चित संख्या में ऐसे ठेकेदारों को अपनी दर (जिस पर वह कार्य या माल सप्लाई कर सकते है ) भेजने के लिए कहा जाता है । इसका उद्देश्य यह है की कम से कम सबसे उपयुक्त ठेकेदार को चुना जा सके।  

 

सामान्यतः: 25000/ - रूपये से अधिक के  सभी कार्यों / सप्लाई के लिए सर्वाधिक खुले और सार्वजनिक तौर पर निविदा बुलाना चाहिए।  मूल्य अनुसूची पर आधारित मामलो में यह सीमा 50,000 /- रूपये तक बढाई जा सकती है।  

 

निम्न परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी निविदा पध्दति के बिना ठेका दे सकता है - 

•   जब इसके लिए कारण पर्याप्त है की ऐसा करना जनता के हित में नही होगा की टेंडर बुलाकर ठेका दिया जाये।  

•  जहां ठेके की कीमत 25, 000/ - तक है और महाप्रबंधक यह समझते है की टेंडर बुलाना लाभदायक या व्यावहारिक नही है।  

•  कार्यों के ठेके जो की रेलवे पर दर सूची के आधार पर दिये जाते है, वहाँ यदि उनकी कीमत 50,000 /- रूपये तक है तो महाप्रबंधक बिना कारण लिखे टेंडर पध्दति के बिना ठेका दे सकते है।

·         अन्य सभी मामलो जहां महाप्रबंधक यह समझता है की टेंडर बुलाना उचित नही, कारण लिखने के बाद वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी को सूचनार्थ भेज सकता है। इसके लिए आवश्यक है की ठेके का परिविभाजन न हो और उचित दर स्वीकार की जाये।  

•  जब यह प्रमाणित किया जा सकता है की इसी प्रकार की वस्तु कही और जगह नही बनाई जा रही है या बेचीं जा रही है, जो की इसके बदले में इस्तेमाल की जा सके।  लेखा विभाग व्दारा ऐसे मामलो में जांच की जाती है । 

 

·     प्राप्त और  स्वीकार करने योग्य सब खोली गई निविदा की प्रभारी कार्यालय व्दारा एक तुलनात्मक विवरण बनाया जाता है।  जिसमें प्रत्येक निविदाकर्ता व्दारा प्रस्तावित दरों और अन्य शर्तों के अलावा पिछली खरीद की कीमत, शर्तों पर टिप्पणी आदि होती है।

·     इस तुलनात्मक विवरण की जाँच में लेखा विभाग की कीमत, शर्तों पर टिप्पणी आदि होती है । इस तुलनात्मक विवरण की जाँच लेखा विभाग के मनोनीत लेखाधिकारी व्दारा की जाती है, जो विवरण की पूर्ण जाँच कर सत्यापन करता है। लेखा सदस्य की सूचनार्थ एक हिमायती टिप्पणी भी तैयार की जाती है।  

·      इसके पश्चात टेंडर पर टेंडर कमेटी व्दारा विचार विमर्श किया जाता है।

·       टेंडर कमेटी का एक सदस्य उपयुक्त स्तर का लेखाधिकारी भी होता है। टेंडर कमेटी के विचार विमर्श के मिनिट्स और सिफारिश लिखित रूप में दर्ज किये जाते है, जिस पर सभी सदस्य हस्ताक्षर करते है और इसे सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाता है।  

  

·    कई बार निविदाकर्ताओ के साथ बातचीत (नेगोशिएसन ) भी की जाती है, जिससे बेहतर दर प्राप्त की जा सके। इस बातचीत में लेखाधिकारी भी सम्मिलित होता है।  

·    नियमानुसार कोई भी ठेकेदार को कार्य या माल की सप्लाई की अनुमति तब तक नही दी जाती जब तक कि संबंधित टेंडर पर सक्षम अधिकारी के व्दारा हस्ताक्षर नही किये जाते है।  

  

निविदाओ के प्रकार

1.      खुली निविदा - इस पध्दति का उपयोग किसी भी कार्य के लिए खर्च किये गये धन का अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिए किया जाता है। सार्वजनिक विज्ञापनों व्दारा विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में सूचनाएँ प्रकाशित की जाती है, जिससे अच्छी प्रतियोगी दरें प्राप्त होती है। सामान्यतः: 50000 रूपये से अधिक मूल्य के सभी कार्यो के लिए यह पध्दति प्रयोग में लाई जाती है , परंतु महाप्रबंधक व्दारा सार्वजनिक हित में 5 लाख रूपये तक के मूल्यों के कार्यों के लिए वित्तीय सहमति प्राप्ति के बाद सीमित निविदा की अनुमति से सकता है। विज्ञापन में दी गई तिथि समय एवं स्थान पर निविदा समिति व्दारा निविदा खोली जाती है और सबसे कम दर वाली निविदा मंजूर की जाती है।

 

2.    सीमित निविदा - इस पध्दति के अंतर्गत निविदा उन्हीं ठेकेदारों से आमंत्रित की जाती है, जो ठेकेदारों की अनुमोदित सूची में होजिन कार्यो की अनुमानित लागत 50 लाख रूपये  तथा महाप्रबंधक  की अनुमति से 5 लाख  तक  के लिए उपयोग में लाई जाती है।  विशेष सीमित निविदा - महाप्रबंधक व्दारा वित्तीय सहमति से अति आवश्यक कार्यो के लिए अनुमोदित सूची के ठेकेदारों में से आमंत्रित की जाती है।

 

3.    एकल निविदा - इस पध्दति में रेल प्रशासन केवल एक विशिष्ट व्यक्ति फर्म या ठेकेदार से निविदा आमंत्रित करता है। यह उस स्थिति में आमंत्रित की जाती है जब किसी ठेके की कीमत गैर एकाधिकार मद में 10 हजार रूपये कम तथा एकाधिकार मद में 50 हजार रूपये से कम हो।  

 

4.    ग्लोबल निविदा - यह पध्दति रेलवे बोर्ड अथवा भारत सरकार व्दारा अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों से कार्य करवाने अथवा खरीद के लिए अपनाई जाती है। इस पध्दति में महाप्रबंधक को कोई पावर नही होता है।  

 

5.    बुलेटिन निविदा - 3 लाख रूपये से कम मूल्य के भण्डार की खरीद के लिए बुलेटिन निविदा मंगाई जाती है। निविदा का प्रकाशन रेलवे व्दारा प्रकाशित मासिक बुलेटिन में किया जाता है, और जो बुलेटिन का सदस्य होता है वह निविदा भेज सकता है ।  

  

विलम्बित और देर से प्राप्त निविदा

 

विलम्बित निविदा  - जब कोई निविदा खोलने से पहले लेकिन प्राप्ति की निर्धारित तारीख और समय के बाद प्राप्त होता है तो उसे विलम्बित निविदा कहते है। ऐसी निविदा को उसी तरह निपटाया जाता है, जिस तरह पूर्व में प्राप्त निविदा निपटाई जाती है।  

देर से प्राप्त निविदा  - जब कोई निविदा, निविदा जमा कराने के दिनांक व समय के बाद तथा निविदा खोलने के पश्चात प्राप्त होती है, उसे देर से प्राप्त निविदा कहते है।

 

 नोट – 1. सभी मामलो में लाल स्याही से लिफाफों पर देर से प्राप्त या विलम्बित शब्द लिखा जाता है।

2. विलम्बित और देर से प्राप्त दोनों प्रकार के निविदा को रजिस्टर में उपयुक्त टिप्पणी दी जाती है।

3. देर से प्राप्त निविदा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नही की जाती है।  

 

निविदा फर्मो की कीमत

 

निविदा फर्मो का मूल्य निविदा की अनुमानित लागत के  अनुसार होती है जो निम्न है - 

 

नोट - यदि उक्त फार्म डाक से मंगाये जाते है तो 100/- रूपये अतिरिक्त प्रभार लगेगा।   

 

बयाने की राशि (अर्नेस्ट मनी) और जमानत की राशि

बयाने की राशि

·       ठेकेदारों व्दारा निविदा के साथ जो राशि जमा कराई जाती है, उसे बयाने की राशि कहते है।  

·       बयाने की राशि जमा कराने का उद्देश्य यह है कि यदि निविदा मंजूर की जाने के बाद ठेकेदारों व्दारा जमानत की राशि जमा नही कराई जाती है और समय पर कार्य प्रारंभ नही किया जाता है तो रेलवे को होने वाली हानि की भरपाई हो सके।

·       वर्तमान में अर्नेस्ट मनी अनुमानित टेंडर लागत का 2 प्रतिशत है जिसे अगले 10 रूपये पूर्णाकित किया जाता है। 10 करोड़ से अधिक राशि पर सिर्फ एक प्रतिशत है ।   

बयाना की राशि स्वीकार करना - बयाना  की राशि निम्नलिखित रूप में स्वीकार की जा सकती है - 

•      नगद रोकड़ के रूप में जमा   कराकर मनी रसीद व्दारा ।  

•      सरकारी प्रतिभूतिया, जिसमें बाजार मूल्य से 5 प्रतिशत कम पर स्टेट लोंन बांड शामिल है

•      जमा रसीदे भुगतान आदेश डिमाण्ड ड्राफ्ट और गारंटी बांड जो या तो भारतीय स्टेट बैक या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के हो सकते है,

•   सभी अनुसूचित बैंकों व्दारा निष्पादित गारंटी बांड या जमा की रसीदें

•    पोस्ट ऑफिस बचत बैंक में जमा

•       राष्ट्रीय बचत पत्रों में जमा

•       12 वर्षीय राष्ट्रीय रक्षा पत्र

•       दस वर्षीय रक्षा जमा,

•       राष्ट्रीय रक्षा जमा

•       यूनिट ट्रस्ट सर्टिफिकेट बाजार मूल्य से 5 प्रतिशत कम या अंकित मूल्य पर इनमे जो भी कम हो।  


जमानत की राशि

·         निविदा मंजूर होने के बाद कार्य प्रारंभ करने से पहले कार्य को सफलता पूर्वक पूर्ण करने के लिए ठेकेदारों व्दारा जो राशि जमा कराई जाती है, उसे जमानत की राशि कहते है।

·          जब टेंडर स्वीकार कर लिया जाता है और स्वीकृति पत्र जारी कर दिया जाता है, तब ठेकेदारों को एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हेतु बुलाया जाता है। उस समय ठेकेदारों ठेके की कुल राशि का 5 प्रतिशत जमानत की राशि के रूप में बैंक गारंटी प्रस्तुत करने पर ही एग्रीमेंट हस्ताक्षर करवाये जाते है।

·          शेष 5 प्रतिशत राशि ठेकेदारों के प्रत्येक रंनिग बिल से भुगतान की जाने वाली राशि के 10 प्रतिशत की कटौती तब तक की जाती है, जब तक की वह कुल ठेका राशि के शेष 5 प्रतिशत तक न पहुँच जाये। कुल जमानत राशि 5 + 5 =10 प्रतिशत ली जाती है। 

·           यदि सफल ठेकेदार चाहे तो अर्नेस्ट मनी को जमानत की राशि में समायोजित करा सकता है।

·          यह राशि ठेकेदारों व्दारा संतोषप्रद कार्य पूरा करने के पश्चात और यदि रखरखाव की अवधि है तो उसके पूरा होने के पश्चात रेलवे के अन्य बकाया आदि का निस्तारण कर बैंक गारंटी बांड की दशा में उसे रिलीज कर दिया जाता है तथा नगद की दशा में राशि का भुगतान बिना ब्याज के ठेकेदारों को कर दिया जाता है।

 

ठेका (कांट्रेक्ट)

परिभाषा - जब दो या दो से अधिक व्यक्ति परस्पर किसी कार्य को करने के लिए एक दूसरे को सूचित करते है,  तो ऐसी लिखित सूचना को करार कहते है।  यदि ऐसा करार जिसे कानून व्दारा मान्यता प्राप्त होती तो वह ठेका बन जाता है अर्थात ठेके में दो व्यक्तियों में या फार्म के बीच किसी कार्य को करने या भण्डार की आपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव किया जाता है वह कानूनी मान्यता प्राप्त हो, उसे ठेका कहते है।  कानून के अनुसार ठेका लिखित रूप में होना चाहिए और उसका सत्यापन गवाहों व्दारा किया जाना चाहिए।

 

 

भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 10 के अनुसार केवल वही करार कानून व्दारा प्रवर्तर्नीय होते है जो ठेके करने के लिए सक्षम पार्टियों की मुक्त सहमति से किसी विधि सम्मत प्रतिफल के लिए और विधि सम्मत उद्देश्य से किए जाते है, जिन्हें स्पष्ट शब्दों में शून्य घोषित नही किया गया है।  यह व्यवस्था किसी ऐसे कानून के अध्याधीन होती है जिसके अनुसार ठेका लिखित रूप में होना चाहिए और उसका अनुप्रमाणन साक्षियों व्दारा किया जाना चाहिए।  

 

एक अच्छे ठेके के सामान्य सिद्धांत

 

एक अच्छे ठेके में निम्न बातों का समावेश होना आवश्यक है -

•   ठेकेदार को क्या, कहां, कब और किसकी संतुष्टि के लिए कार्य करना है कि अच्छी तरह समझ होनी चाहिए।

•   रेल प्रशासन का क्या कार्य है और किन शर्तों पर किया जाना है, कि अच्छी तरह समझ होनी चाहिए।

•   भुगतान कब, किसे कितना, किस माध्यम से, किसके लिए कहां और किस प्रकार करना है एवं भुगतान का आधार क्या रहेगा, कि जानकारी होनी चाहिए। 

•   पर्याप्त पर्यवेक्षण, सरकारी संपति की देखभाल और बाहरी हितो की सुरक्षा एवं कर्मचारियों की हितो की सुरक्षा के संबंध में ठेकेदार की जिम्मेदारी क्या होगीकि जानकारी होनी चाहिए। 

•   ठेकेदार की क्या जबाबदारी होगीकि जानकारी होनी चाहिए। 

•   ठेके के लिए मानक फर्मो का उपयोग किया जाना चाहिए और उनकी शर्तो की पहले से अच्छी तरह जाँच कर ली जानी चाहिए,

•   किसी पार्टी व्दारा ठेका शर्ते भंग करने पर अपनाई जाने वाली पध्दति क्या होगी, विवाद का निपटारा कैसे होगा,

•   ठेका कानून एवं वित्तीय सलाह के अनुसार होना चाहिए और कोई भी शर्त अनिश्चित, अस्पष्ट एवं असामान्य किस्म की नही होना चाहिए,

 •   ठेके में एक बार जिन शर्तो को शामिल किया गया है, उनको बिना कानून एवं वित्तीय सलाह के परिवर्तित नही किया जाना चाहिए,

•   ठेकेदार को सौपी गई रेलवे संपति की सुरक्षा व्यवस्था का प्रावधान किया जाना चाहिए,

•   लम्बे समय के ठेके में इस शर्त का समावेश होना चाहिए की रेल प्रशासन 6 महीने की नोटिस के करार समाप्त कर सकता है।  

•    ठेकेदार के विरुध्द उत्पन्न होने वाले सभी दावों को मंजूर या रद्द करने की शक्ति रेल प्रशासन के पास सुरक्षित रहनी चाहिए ।  

  

ठेकेदारों के प्रकार

निर्माण कार्यो के लिए ठेके तीन प्रकार के होते है - 

एक मुश्त ठेका - जब किसी कार्य के लिए एक मुश्त भुगतान पर एक निर्धारित अवधि में एक समय में पूर्ण करने के लिए जो ठेका दिया जाता है, उसे एकमुश्त ठेका कहते है। इसके अंतर्गत ठेकेदार निर्माण कार्य , सामान की सप्लाई एक निर्धारित समय में निश्चित धन राशि के करता है ।


ठेकेदार को धन प्राप्त होने पर उसकी जवाबदारी होती है की वह निर्माण कार्य या सामान की सप्लाई एक निर्धारित समय में  लिए पूरा कर के  दे ,चाहे इसके लिए उसे कितना भी काम या सामान की सप्लाई करना पड़े । 

ऐसे ठेकों में दरो या कीमतों का समझौता किया जाता है यदि बाद में निर्माण कार्य या सामान की सप्लाई के संबंध में कोई परिवर्तन किया जाता है तो एकमुश्त राशि उसी स्केल के अनुसार वृध्दि या कमी की जा सकती है।  

दर (अनुसूचित) ठेका : इस प्रकार के ठेके में एक दर निर्धारित की जाती है।  उसी निर्धारित दर पर निर्धारित अवधि तक ठेकेदार को कार्य करना होता है । ठेकेदार को भुगतान उसी दर के अनुसार किया  जाता है। इस ठेके में मात्रा और निर्धारित यूनिटों के दरो के आधार पर ठेके की राशि दर्शायी जा सकती है ।  


फुटकर (पीस वर्क ) ठेका : इसके अंतर्गत प्रति यूनिट  दर निर्धारित की जाती है।  इसमें इस बात का निर्धारण नही किया जाता है कि कितना कार्य करना है या कितनी अवधि में कार्य करना है । रेलवे में इस प्रकार के ठेके प्रचलित है जब कार्य की प्रकृति छोटे - छोटे यूनिटों में विभाजित करने जैसी होती है, तब इस प्रकार के ठेके दिये जाते है इसमें ठेकेदार व्दारा जितने यूनिट का निर्माण किया जाता है उसी के अनुसार प्रति यूनिट की दर से भुगतान किया जाता है।  

 

भण्डार की आपूर्ति के लिए ठेके दो प्रकार के होते है – 

 

दर ठेका - इसमें भण्डार की सप्लाई के लिए दर का ठेका दिया जाता है। ठेकेदार व्दारा निर्धारित दर पर जब  भी मांग की जाए निर्धारित अवधि में निर्धारित मात्र में भण्डार की आपूर्ति की जाती है।  

 चालू (रनिंग) ठेका - इसमें भण्डार की आपूर्ति ठेकेदार व्दारा निर्धारित दर पर निर्धारित मात्रा में निर्धारित अवधि तक की जाती है ।  निर्धारित मात्र में 25 प्रतिशत का विचलन हो सकता है।  

 


OPEN TENDER (ओपन टेंडर)

 OPEN TENDER (ओपन टेंडर)

परिभाषा (Definition)

जब निविदा (Tender) आम जनता से व्यापक प्रतिस्पर्धा (Wide Competition) प्राप्त करने के उद्देश्य से सार्वजनिक विज्ञापन (Public Advertisement) द्वारा आमंत्रित की जाती है, तो उसे Open Tender (ओपन टेंडर) कहा जाता है।

यह निविदा आमंत्रण की सबसे खुली (Open), पारदर्शी (Transparent) तथा प्रतिस्पर्धात्मक (Competitive) प्रणाली मानी जाती है, जिसमें पात्रता शर्तों को पूरा करने वाला कोई भी इच्छुक आपूर्तिकर्ता (Supplier), ठेकेदार (Contractor) अथवा फर्म भाग ले सकती है।

रेलवे टेंडर सिस्टम (Railway Tender System)

रेलवे टेंडर सिस्टम  (Railway Tender System)

भारतीय रेल के संदर्भ में भण्डार संहिता के पैरा ३२३ के अनुसार सुस्थापित निर्माताओ / आपूर्तिकर्ताओ से निविदायें जारी करके प्रतिस्पर्धी कोटेशन प्राप्त की जानी चाहिए मद की प्रकृति, आपूर्ति का स्रोत, कार्य का श्रेत्र तथा अन्य तथ्यों के आधार पर विभिन्न प्रकार की टेण्डर व्यवस्था अपनायी जाती है.  किन्ही विशेष परिस्थितियों में जहां उचित कारण हों तो, महाप्रबन्धक इस हेतु  निबिदायें नहीं आंमत्रित करने का फैसला ले सकते है । वर्तमान में टेण्डर व्यव्स्था के अंर्तगत टेण्डर जारी करने की सक्षमताएं आगामी पैरा में बतायी गयी हैं इससे पूर्व विभिन्न प्रकार के टेण्डर के बारे में जान लेना आवश्यक है, यें निम्नलिखित है-

Q. & Ans - Why is earnest money taken ?

 Q. - Why is earnest money taken ?

Ans. - Earnest money – 

The Tenderer / Contracts shall be required to deposit Earnest money with the tender for the due performance with the stipulation to keep the offer open till such date as specified in the tender. Earnest money should be either in cash, deposit receipts, pay orders, demand draft.

In railway contracts, earnest money is taken as a form of security from the bidder or contractor. The earnest money deposit (EMD) is a percentage of the total contract value that is deposited by the bidder with the railway authorities as a demonstration of their serious intent to execute the work as per the terms and conditions of the contract. The earnest money shall be 2% of estimated tender value. The earnest money shall be rounded to the nearest Rs. 10/- . Earnest money shall be applicable for all modes of tendering

Q - What are the various modes of tendering issued for procurement of materials by IR ? Discuss the need for adopting particular mode of tendering and also specify financial limits for issuing these tenders in normal circumstances.

Q -  What are the various modes of tendering issued for procurement of materials by IR ? Discuss the need for adopting particular mode of tendering and also specify financial limits for issuing these tenders in normal circumstances.

 Ans. The various modes of tendering issued for procurement of materials by IR are : 
(a) Open Tender 
(b) Limited Tender 
(c) Single Tender 
(d) Special Limited Tenders 
(e) Global Tender 

(a) Open Tender: 
This system of invitation of tender by public advertisement in the most open and public manner possible is called open tender. This is generally adopted in all cases in which the estimated value of purchase is over Rs. 10 lakh in normal circumstances.

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Account & Finance Question & Answer Railway Financial Rules Short Notes RAILWAY BUDGET Tender Accounts Rules Descriptive Question & Answer Store Management & Account Traffic Account LDCE Spl. Functions of Accounts Department Cannons/Standards of Financial Propriety Departmental Exam Expenditure Management Railway Financial Rules Book STATION BALANCE SHEET 6.2 Consolidated Fund Of India Audit & Audit Report Contract Management Earnest Money INDEX Inventory Management Railway Financial Code Rules of Re-appropriation 0 FINANCIAL RULES SYLLABUS 3. INVESTMENT PLANNING AND WORKS BUDGET 6.9 APPROPRIATION ACCOUNT APPROPRIATION ACCOUNT Account Accounting System in Railways Annual Financial Statement Appropriation Accounts & Process Audit of Railway Expenditure & Revenue August Review BOT / BOOT Schemes Budgetary Practices Budgetary Process & Approval Mechanism CONTINGENCY FUND OF INDIA Capital Expenditure & Estimates Challenges & Future Prospects . Financial Management Charged Expenditure Classification of Railway Expenditure Co6 Co7 Computerization of Stores Accounts Concept of Railway Accounting Constitutional Provisions Contract & Its Types Control over Expenditure Corruption Prevention Defin Demands for Grants Depreciation Reserve Fund Development Fund Digital Reforms Digitization in Railways Duties and Responsibility Final Modification Financial Commissioner – FC Financial Control Financial Discipline Financial Discipline & Control in Railways Financial Management Financial Powers & Delegation Financial Reforms Functions of Traffic Accounts Department GeM Government Accounting & Financial Principles Government e-Marketplace Green Initiatives H.05 वित्त एवं व्यय पर नियंत्रण H.06 सांविधिक लेखा - परीक्षा H.07 लेखा निरीक्षण H.09 कारखाना लेखा H.11 यातायात लेखा H.12 रेलवे यातायात H2. 19 बजट आदेश (Budget Order) / बजट आबंटन (Budget Allotment) में अन्तर H2.01 Revised Estimate/Details Estimate में अंतर H2.02 Abstract Estimate / Details Estimate में अंतर H2.03 Revised Estimate / Supplementary Estimate में अंतर H2.04 Completion Estimate / Completion Report में अंतर H2.05 Delay Tender / Late Tender में अन्तर H2.06 Single Tender / Single offer में अंतर H2.07 ओपन टेंडर / लिमिटेड टेंडर में अंतर H2.08. Earnest Money Deposit / Security Deposit में अन्तर H2.09 Security Deposit / Performance Guarantee में अन्तर H2.10 Deposit Miscellaneous / Miscellaneous Advance में अंतर H2.11 On Account Bill / Final Bill में अंतर H2.12 Rate Contract / Running Contract में अंतर H2.13 Demand Payable / Demand Recoverable में अन्तर H2.14 General Books / Subsidiary Books में अंतर H2.15 Consolidated Fund समेकित निधि / Contingency Fund आकस्मिक में अंतर H2.17 Draft Para / Audit Para में अन्तर H2.18 Traffic (Gross) Earning / Traffic (Gross) Receipt में अन्तर H2.20 स्वीकृत व्यय (वोटेड Expenditure) / प्रभ्रत व्यय (Charged Expenditure) में अन्तर H2.21 Estimate Committee / Public Committee में अन्तर H2.22 Public Committee / Railway Convention committee में अन्तर H2.23 Remittance Transaction / Transfer Transaction में अन्तर H2.24 Stock Item / Non-Stock Items में अन्तर H2.26 TC / JV में अन्तर H8.3 वित्तीय औचित्य H8.4 सर्वेक्षण HIstory ऑफ Railway Indian Railways Inventory Control Letter of credit Limited Tender Local Purchase Material modification OPS/NPS/UPS Open Tender Operating Ratio Parliamentary Control Payment System Pension & Retirement Benefits in Railways Pink Book Procurement System in Railways Procurement in Indian Railways Public Accountability REVISED AND DETAIL ESTIMATE में अंतर Railway Accounts Code Railway Bill Passing Railway Financial Code & Manuals Railway Funds & Reserves Railway Investment Plan Railway Production Units Railway Statistics Railway Tender System Railways Resource Augmentation in Railways Revenue Management Role of Ministry of Railways & Finance Department Rules of Allocation Security Deposit Single Tender Sources of Railway Revenue Special Limited Tender Station Outstanding Stores Budget Tender Committee Tender Documents Tender Notice Traffic Audit Inspection Traffic Earnings Types of Budgets Urgency Certificate Work Contracts Works Programme Workshop & Manufacturing Accounts Zero Base Budget.