Paperback Book - भारतीय रेल : वित्तीय नियम एवं प्रबंधन
eBook - भारतीय रेल : वित्तीय नियम एवं प्रबंधन
अध्याय 1
(Financial Framework of Indian Railways)
भारतीय रेल केवल एक परिवहन तंत्र (Transport System) नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना का आधार स्तंभ है। इसकी भूमिका केवल
यात्रियों और माल की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय एकता, औद्योगिक विकास और राजस्व सृजन में भी महत्वपूर्ण
स्थान रखती है। रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के अंतर्गत विकसित वित्तीय संरचना (Financial
Structure) अपनी प्रकृति में अद्वितीय
है क्योंकि इसमें एक ओर सरकारी तंत्र (Government System) की जवाबदेही और नियंत्रण निहित है, तो दूसरी ओर व्यावसायिक उपक्रम (Commercial
Undertaking) की तरह राजस्व सृजन,
लाभ-हानि की गणना और दक्षता की
अपेक्षा भी की जाती है।
भारतीय रेल का इतिहास 1853 से प्रारंभ होता है, जब पहली यात्री ट्रेन बंबई (अब मुंबई) से ठाणे तक चलाई गई। प्रारंभिक दशकों में रेलवे का संचालन निजी कंपनियों द्वारा किया गया, जिन्हें "गारंटी प्रणाली (Guarantee System)" के अंतर्गत निवेश पर निश्चित प्रतिफल (Return) की गारंटी दी जाती थी। यह व्यवस्था ब्रिटिश शासन की वित्तीय नीतियों से प्रेरित थी, जहाँ विदेशी निवेशकों को सुरक्षित लाभ सुनिश्चित करने हेतु सरकारी संरक्षण दिया जाता था।
1880 और 1890 के दशकों में रेलवे का स्वामित्व और संचालन धीरे-धीरे सरकार के हाथों में आने लगा। 1920 के दशक में रेलवे की वित्तीय जटिलता और व्यापकता को देखते हुए इसे सामान्य केंद्रीय बजट (General Budget) से अलग कर स्वतंत्र रेलवे बजट (Railway Budget) की परंपरा शुरू की गई। इसका उद्देश्य यह था कि रेलवे के भारी-भरकम राजस्व और व्यय पर विशिष्ट ध्यान दिया जा सके तथा संसदीय नियंत्रण और जवाबदेही को स्पष्ट बनाया जा सके।
हालाँकि, वर्ष 2017-18 से रेलवे बजट को पुनः सामान्य केंद्रीय बजट में विलय कर दिया गया। इसका औचित्य यह था कि भारतीय रेल की वित्तीय योजना अब केवल विभागीय दृष्टि से नहीं बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक नीति और बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) के व्यापक संदर्भ में देखी जानी चाहिए। बावजूद इसके, भारतीय रेल का वित्तीय ढाँचा अब भी अन्य सरकारी विभागों से अलग और विशिष्ट (Distinct) है।